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Mukesh Lalit

  • मेटा की नई तकनीकी प्रोटोटाइप्स का ख्वाब देखना एक बेकार की बात है। क्या यह सच में सोचते हैं कि हम उनके चमकदार वादों पर विश्वास करेंगे? उन्होंने तीन प्रोटोटाइप्स के बारे में बात की है, जो "कभी नहीं देखे गए दृश्य प्रदर्शन" का दावा करते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक और बाजार की चाल है या वास्तव में कुछ मूल्यवान है?

    हमारी आंखों के सामने ये कंपनियां हमें हर बार नई तकनीकों के नाम पर बेवकूफ बनाती हैं। पहले हमें VR तकनीक का दीवाना बनाया गया, और अब मेटा हमें हल्के-फुल्के हेडसेट्स का सपना दिखा रहा है, जो एक साधारण चश्मे के वजन के बराबर होंगे। क्या यह एक मजाक है? क्या आप सोचते हैं कि बस वजन कम करने से हमें बेहतर अनुभव मिलेगा? असलियत यह है कि तकनीकी प्रगति के नाम पर हमे केवल धोखे मिलते हैं।

    मेटा केवल एक बड़े नाम के पीछे छिपा हुआ है, जो अपने उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को समझने में पूरी तरह असफल रहा है। उनके प्रोटोटाइप्स का प्रदर्शन केवल एक मार्केटिंग रणनीति है। जब तक वे वास्तविकता में हमें एक बेहतरीन अनुभव नहीं देते, तब तक यह सब सिर्फ एक भ्रम है। क्या हम सच में यह सोचते हैं कि मेटा हमें ऐसी तकनीक प्रदान कर सकता है जो हमारे अनुभव को बदल देगी? अगर ऐसा होता, तो वे पहले ही कर चुके होते।

    अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि मेटा और इसके प्रोटोटाइप्स केवल एक दिखावा है। हमें सच्चाई को पहचानना चाहिए और इस तरह के द्वार का अनुग्रह नहीं करना चाहिए। हमें ऐसे उत्पादों को खारिज करना चाहिए जो सिर्फ दिखावे के लिए बने हैं। तकनीकी प्रगति का असली मतलब यह नहीं है कि हमें बेवकूफ बनाकर उनके प्रोटोटाइप्स का समर्थन करना चाहिए। सच्चाई को पहचानें और अपने अधिकारों के लिए खड़े रहें!

    #Meta #VR #टेक्नोलॉजी #प्रोटोटाइप #धोखा
    मेटा की नई तकनीकी प्रोटोटाइप्स का ख्वाब देखना एक बेकार की बात है। क्या यह सच में सोचते हैं कि हम उनके चमकदार वादों पर विश्वास करेंगे? उन्होंने तीन प्रोटोटाइप्स के बारे में बात की है, जो "कभी नहीं देखे गए दृश्य प्रदर्शन" का दावा करते हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक और बाजार की चाल है या वास्तव में कुछ मूल्यवान है? हमारी आंखों के सामने ये कंपनियां हमें हर बार नई तकनीकों के नाम पर बेवकूफ बनाती हैं। पहले हमें VR तकनीक का दीवाना बनाया गया, और अब मेटा हमें हल्के-फुल्के हेडसेट्स का सपना दिखा रहा है, जो एक साधारण चश्मे के वजन के बराबर होंगे। क्या यह एक मजाक है? क्या आप सोचते हैं कि बस वजन कम करने से हमें बेहतर अनुभव मिलेगा? असलियत यह है कि तकनीकी प्रगति के नाम पर हमे केवल धोखे मिलते हैं। मेटा केवल एक बड़े नाम के पीछे छिपा हुआ है, जो अपने उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को समझने में पूरी तरह असफल रहा है। उनके प्रोटोटाइप्स का प्रदर्शन केवल एक मार्केटिंग रणनीति है। जब तक वे वास्तविकता में हमें एक बेहतरीन अनुभव नहीं देते, तब तक यह सब सिर्फ एक भ्रम है। क्या हम सच में यह सोचते हैं कि मेटा हमें ऐसी तकनीक प्रदान कर सकता है जो हमारे अनुभव को बदल देगी? अगर ऐसा होता, तो वे पहले ही कर चुके होते। अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि मेटा और इसके प्रोटोटाइप्स केवल एक दिखावा है। हमें सच्चाई को पहचानना चाहिए और इस तरह के द्वार का अनुग्रह नहीं करना चाहिए। हमें ऐसे उत्पादों को खारिज करना चाहिए जो सिर्फ दिखावे के लिए बने हैं। तकनीकी प्रगति का असली मतलब यह नहीं है कि हमें बेवकूफ बनाकर उनके प्रोटोटाइप्स का समर्थन करना चाहिए। सच्चाई को पहचानें और अपने अधिकारों के लिए खड़े रहें! #Meta #VR #टेक्नोलॉजी #प्रोटोटाइप #धोखा
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    Meta présente trois prototypes aux performances visuelles jamais vues
    Meta rêve d’un futur VR où les casques ne pèseraient pas plus qu’une simple paire […] Cet article Meta présente trois prototypes aux performances visuelles jamais vues a été publié sur REALITE-VIRTUELLE.COM.
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