जब मैं सोचता हूँ कि कैसे "ग्लो-पाउडर" की खोज ने मुझे अंदर से चीर दिया है, तो दिल की गहराइयों में एक खालीपन महसूस होता है। ये मेरे लिए सिर्फ एक प्रयोग नहीं था, बल्कि एक यात्रा थी—जो कहीं न कहीं मुझे उस अंधेरे गहराइयों में ले गई, जहाँ खुशी की किरणें भी नहीं पहुँच पाती।
हर एक स्कैल्पल की चमक, जैसे कि वो मेरी आत्मा पर गहरा निशान छोड़ गए। पहले मैंने सोचा था कि ये बदलाव मुझे एक नई पहचान देंगे, लेकिन अब यह बोध होता है कि मैंने खुद को ही खो दिया है। जब मैं अपने चेहरे पर उन घावों को देखता हूँ, तो लगता है कि मैं एक भूतिया साया हूँ, जो खुद को ढूँढने की कोशिश कर रहा है।
क्या आपने कभी इतने अकेलेपन का अनुभव किया है कि आप खुद से ही बातें करने लगते हैं? यह एक अजीब सा अहसास है। जैसे मैं अपनी ही परछाई से बातचीत कर रहा हूँ, लेकिन वो परछाई भी मुझसे दूर भाग रही है। मेरी आँखों में वो चमक नहीं रही, जो कभी थी। और अब मैं सोचता हूँ, क्या ये सब सिर्फ एक खोज थी, या मैंने खुद को ही खो दिया?
हर दिन एक नई चुनौती है। उन घावों के साथ जीना, जो न केवल मेरे शरीर पर हैं, बल्कि मेरी आत्मा पर भी। मुझे यह समझ में नहीं आता कि क्या मैं कभी ठीक हो पाऊँगा। मेरे अंदर के डर और संदेह ने मुझे एक ऐसी खोखली जगह पर डाल दिया है, जहाँ से बाहर निकलना मुश्किल लगता है।
क्या किसी ने कभी यह कहा है कि "खुद को बदलने की कोशिश में, हो सकता है कि हम खुद को ही खो दें"? ये शब्द अब मेरे लिए एक गहरी सच्चाई बन गए हैं। जब मैं उन क्षणों को याद करता हूँ जब मैंने खुद से वादा किया था कि मैं कभी हार नहीं मानूंगा, तो अब वो वादे बस एक याद बनकर रह गए हैं—एक बेतरतीब सा सपना।
मैं बस यही चाहता हूँ कि कोई मुझे समझे, कोई मेरी कहानी सुने। लेकिन क्या कोई सुनने वाला है? इस अकेलेपन के अंधेरे में, मैं खुद को ही खोजने की कोशिश कर रहा हूँ, और शायद यही मेरी सबसे बड़ी लड़ाई है।
#अकेलापन #घाव #खुदकोखोना #भावनाएँ #ग्लोपाउडर
हर एक स्कैल्पल की चमक, जैसे कि वो मेरी आत्मा पर गहरा निशान छोड़ गए। पहले मैंने सोचा था कि ये बदलाव मुझे एक नई पहचान देंगे, लेकिन अब यह बोध होता है कि मैंने खुद को ही खो दिया है। जब मैं अपने चेहरे पर उन घावों को देखता हूँ, तो लगता है कि मैं एक भूतिया साया हूँ, जो खुद को ढूँढने की कोशिश कर रहा है।
क्या आपने कभी इतने अकेलेपन का अनुभव किया है कि आप खुद से ही बातें करने लगते हैं? यह एक अजीब सा अहसास है। जैसे मैं अपनी ही परछाई से बातचीत कर रहा हूँ, लेकिन वो परछाई भी मुझसे दूर भाग रही है। मेरी आँखों में वो चमक नहीं रही, जो कभी थी। और अब मैं सोचता हूँ, क्या ये सब सिर्फ एक खोज थी, या मैंने खुद को ही खो दिया?
हर दिन एक नई चुनौती है। उन घावों के साथ जीना, जो न केवल मेरे शरीर पर हैं, बल्कि मेरी आत्मा पर भी। मुझे यह समझ में नहीं आता कि क्या मैं कभी ठीक हो पाऊँगा। मेरे अंदर के डर और संदेह ने मुझे एक ऐसी खोखली जगह पर डाल दिया है, जहाँ से बाहर निकलना मुश्किल लगता है।
क्या किसी ने कभी यह कहा है कि "खुद को बदलने की कोशिश में, हो सकता है कि हम खुद को ही खो दें"? ये शब्द अब मेरे लिए एक गहरी सच्चाई बन गए हैं। जब मैं उन क्षणों को याद करता हूँ जब मैंने खुद से वादा किया था कि मैं कभी हार नहीं मानूंगा, तो अब वो वादे बस एक याद बनकर रह गए हैं—एक बेतरतीब सा सपना।
मैं बस यही चाहता हूँ कि कोई मुझे समझे, कोई मेरी कहानी सुने। लेकिन क्या कोई सुनने वाला है? इस अकेलेपन के अंधेरे में, मैं खुद को ही खोजने की कोशिश कर रहा हूँ, और शायद यही मेरी सबसे बड़ी लड़ाई है।
#अकेलापन #घाव #खुदकोखोना #भावनाएँ #ग्लोपाउडर
जब मैं सोचता हूँ कि कैसे "ग्लो-पाउडर" की खोज ने मुझे अंदर से चीर दिया है, तो दिल की गहराइयों में एक खालीपन महसूस होता है। ये मेरे लिए सिर्फ एक प्रयोग नहीं था, बल्कि एक यात्रा थी—जो कहीं न कहीं मुझे उस अंधेरे गहराइयों में ले गई, जहाँ खुशी की किरणें भी नहीं पहुँच पाती।
हर एक स्कैल्पल की चमक, जैसे कि वो मेरी आत्मा पर गहरा निशान छोड़ गए। पहले मैंने सोचा था कि ये बदलाव मुझे एक नई पहचान देंगे, लेकिन अब यह बोध होता है कि मैंने खुद को ही खो दिया है। जब मैं अपने चेहरे पर उन घावों को देखता हूँ, तो लगता है कि मैं एक भूतिया साया हूँ, जो खुद को ढूँढने की कोशिश कर रहा है।
क्या आपने कभी इतने अकेलेपन का अनुभव किया है कि आप खुद से ही बातें करने लगते हैं? यह एक अजीब सा अहसास है। जैसे मैं अपनी ही परछाई से बातचीत कर रहा हूँ, लेकिन वो परछाई भी मुझसे दूर भाग रही है। मेरी आँखों में वो चमक नहीं रही, जो कभी थी। और अब मैं सोचता हूँ, क्या ये सब सिर्फ एक खोज थी, या मैंने खुद को ही खो दिया?
हर दिन एक नई चुनौती है। उन घावों के साथ जीना, जो न केवल मेरे शरीर पर हैं, बल्कि मेरी आत्मा पर भी। मुझे यह समझ में नहीं आता कि क्या मैं कभी ठीक हो पाऊँगा। मेरे अंदर के डर और संदेह ने मुझे एक ऐसी खोखली जगह पर डाल दिया है, जहाँ से बाहर निकलना मुश्किल लगता है।
क्या किसी ने कभी यह कहा है कि "खुद को बदलने की कोशिश में, हो सकता है कि हम खुद को ही खो दें"? ये शब्द अब मेरे लिए एक गहरी सच्चाई बन गए हैं। जब मैं उन क्षणों को याद करता हूँ जब मैंने खुद से वादा किया था कि मैं कभी हार नहीं मानूंगा, तो अब वो वादे बस एक याद बनकर रह गए हैं—एक बेतरतीब सा सपना।
मैं बस यही चाहता हूँ कि कोई मुझे समझे, कोई मेरी कहानी सुने। लेकिन क्या कोई सुनने वाला है? इस अकेलेपन के अंधेरे में, मैं खुद को ही खोजने की कोशिश कर रहा हूँ, और शायद यही मेरी सबसे बड़ी लड़ाई है।
#अकेलापन #घाव #खुदकोखोना #भावनाएँ #ग्लोपाउडर
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