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खुद को अकेला महसूस करना शायद सबसे दर्दनाक अनुभव है। जब चारों ओर लोग हों, लेकिन दिल में एक गहरी खामोशी हो, तो यह और भी कष्टदायक हो जाता है। हाल ही में व्हाइट हाउस में टेक सीईओ द्वारा डोनाल्ड ट्रम्प की तारीफ का जो नज़ारा देखा गया, वह मेरे दिल में एक और ठेस दे गया।

क्या यह सही है कि हम अपने सिद्धांतों को ताक पर रखकर किसी की तारीफ करें? जब मैं उन सीईओ को देखता हूं, जो एकजुट होकर एक व्यक्ति की तरफ झुके हुए थे, तो मुझे यह सोचकर बहुत दर्द होता है कि क्या हमने अपनी आत्मा को बेच दिया है? क्या हम सच्चाई और नैतिकता को ताक पर रखकर सिर्फ सत्ता के करीब रहना चाहते हैं?

यहां तक कि जब हम अपने प्रियजनों के साथ होते हैं, तो भी अगर हम अपने अंदर की गहराई को नहीं पहचानते, तो हम अकेले रह जाते हैं। क्या यह दुनिया इतनी कठोर हो गई है कि हम अपनी भावनाओं को छिपा लें और केवल दिखावे की दुनिया में जीते रहें? मुझे यह सोचकर निराशा होती है कि क्या हम सभी ने अपने अंदर के इंसान को खो दिया है।

टेक के शीर्ष नेताओं द्वारा ट्रम्प के प्रति प्रदर्शित वफादारी एक संकेत है कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसा पल है जहां राजनीति और प्रौद्योगिकी के बीच का अंतर धुंधला हो गया है। क्या हम केवल अपने स्वार्थों के लिए एक-दूसरे को धोखा देने के लिए तैयार हैं? क्या हम सच में ऐसे समाज में जीना चाहते हैं, जहां हर कोई एक-दूसरे का उपयोग कर रहा है?

ये सब बातें मेरे दिल में एक भारीपन छोड़ देती हैं। कभी-कभी, मुझे लगता है कि मेरी आवाज़ इस भव्यता में खो गई है। मेरे विचार और भावनाएँ कहीं दूर जा रही हैं, और मैं सिर्फ एक दर्शक बनकर रह जाता हूं। मुझे यह समझ में नहीं आता कि क्या हम कभी वापस उस सच्चाई को पा सकेंगे, जिसे हमने खो दिया है।

अकेलापन एक ऐसा साथी है, जो कभी नहीं छोड़ता। भले ही हम एक मेज पर बैठे हों, लेकिन दिल के अंदर की खामोशी कभी-कभी सबसे ऊंची आवाज़ होती है। क्या हमें इस खामोशी को तोड़ने का साहस मिलेगा? या हम इसी तरह एक-दूसरे से दूर होते जाएंगे?

#हंसी #खामोशी #अकेलापन #दर्द #आत्मा
खुद को अकेला महसूस करना शायद सबसे दर्दनाक अनुभव है। जब चारों ओर लोग हों, लेकिन दिल में एक गहरी खामोशी हो, तो यह और भी कष्टदायक हो जाता है। हाल ही में व्हाइट हाउस में टेक सीईओ द्वारा डोनाल्ड ट्रम्प की तारीफ का जो नज़ारा देखा गया, वह मेरे दिल में एक और ठेस दे गया। क्या यह सही है कि हम अपने सिद्धांतों को ताक पर रखकर किसी की तारीफ करें? जब मैं उन सीईओ को देखता हूं, जो एकजुट होकर एक व्यक्ति की तरफ झुके हुए थे, तो मुझे यह सोचकर बहुत दर्द होता है कि क्या हमने अपनी आत्मा को बेच दिया है? क्या हम सच्चाई और नैतिकता को ताक पर रखकर सिर्फ सत्ता के करीब रहना चाहते हैं? यहां तक कि जब हम अपने प्रियजनों के साथ होते हैं, तो भी अगर हम अपने अंदर की गहराई को नहीं पहचानते, तो हम अकेले रह जाते हैं। क्या यह दुनिया इतनी कठोर हो गई है कि हम अपनी भावनाओं को छिपा लें और केवल दिखावे की दुनिया में जीते रहें? मुझे यह सोचकर निराशा होती है कि क्या हम सभी ने अपने अंदर के इंसान को खो दिया है। टेक के शीर्ष नेताओं द्वारा ट्रम्प के प्रति प्रदर्शित वफादारी एक संकेत है कि हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं। यह एक ऐसा पल है जहां राजनीति और प्रौद्योगिकी के बीच का अंतर धुंधला हो गया है। क्या हम केवल अपने स्वार्थों के लिए एक-दूसरे को धोखा देने के लिए तैयार हैं? क्या हम सच में ऐसे समाज में जीना चाहते हैं, जहां हर कोई एक-दूसरे का उपयोग कर रहा है? ये सब बातें मेरे दिल में एक भारीपन छोड़ देती हैं। कभी-कभी, मुझे लगता है कि मेरी आवाज़ इस भव्यता में खो गई है। मेरे विचार और भावनाएँ कहीं दूर जा रही हैं, और मैं सिर्फ एक दर्शक बनकर रह जाता हूं। मुझे यह समझ में नहीं आता कि क्या हम कभी वापस उस सच्चाई को पा सकेंगे, जिसे हमने खो दिया है। अकेलापन एक ऐसा साथी है, जो कभी नहीं छोड़ता। भले ही हम एक मेज पर बैठे हों, लेकिन दिल के अंदर की खामोशी कभी-कभी सबसे ऊंची आवाज़ होती है। क्या हमें इस खामोशी को तोड़ने का साहस मिलेगा? या हम इसी तरह एक-दूसरे से दूर होते जाएंगे? #हंसी #खामोशी #अकेलापन #दर्द #आत्मा
Tech CEOs Praise Donald Trump at White House Dinner
At a White House dinner Thursday night, America’s tech executives put on an uncanny display of fealty to Donald Trump.
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